✍️✍️ फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन हड़पने और पुलिस की मिलीभगत पर FIR के निर्देश


वाराणसी:

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मनीष कुमार-II की अदालत ने जमीन के फर्जी कागजात तैयार करने, धोखाधड़ी करने और इसमें कथित रूप से शामिल पुलिस चौकी प्रभारी के विरुद्ध गंभीर रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने थाना चौबेपुर को निर्देशित किया है कि इस मामले में सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना सुनिश्चित की जाए।


क्या है पूरा मामला?

प्रार्थी विरेन्द्र कुमार मौर्या ने अदालत में धारा 173(4) BNSS के तहत प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थी का आरोप है कि उसने 2013 में ग्राम बराई (चौबेपुर) में बाबूलाल नामक व्यक्ति से 2720 वर्गफीट भूमि बैनामे के जरिए खरीदी थी। आरोप के मुख्य बिंदु के अनुसार विपक्षी लक्ष्मीना देवी ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ₹100 के स्टाम्प पर फर्जी विक्रय पत्र तैयार किया और बाबूलाल के फर्जी हस्ताक्षर बनाए ताकि प्रार्थी का नामान्तरण रुक सके। अभियुक्तों ने कलेक्ट्रेट के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का उपयोग कर 1979 का एक फर्जी सुलहनामा (दानपत्र) तैयार किया। जांच में पता चला कि जिस पदनाम और न्यायालय की मुहर लगी थी, उसका गठन ही 1990 के बाद हुआ था। प्रार्थी का आरोप है कि चिरईगांव चौकी प्रभारी (उपनिरीक्षक) पंकज कुमार राय ने अभियुक्तों का साथ दिया। आरोप है कि दरोगा ने प्रार्थी पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और इनकार करने पर उसे व उसके बेटों को बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।


न्यायालय का रुख और आदेश

पूर्व में इस प्रार्थना-पत्र को सिविल वाद बताकर निरस्त कर दिया गया था, लेकिन निगरानी न्यायालय (Revision Court) के हस्तक्षेप के बाद इसे पुनः सुना गया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आवेदन में वर्णित तथ्यों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का होना प्रतीत होता है। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस द्वारा गहन विवेचना का पर्याप्त आधार है। अदालत ने प्रार्थी के प्रार्थना-पत्र को स्वीकार करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को तुरंत FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।

""विपक्षी दरोगा पंकज कुमार राय ने अपनी आपत्ति में इन आरोपों को निराधार बताया था और कहा था कि उन्होंने केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की थी।""

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