✍️✍️ साड़ी कारोबारी दोषमुक्त, 26 साल पुराना धोखाधड़ी का मामला
बैंक से धोखाधड़ी कर हजारों रुपए निकालने के 26 साल पुराने मामले में आरोपित साड़ी कारोबारी को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) अजय प्रताप की अदालत ने लाहौरी टोला, सिगरा निवासी आरोपित राजकुमार कपूर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
अदालत में ""बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव, नरेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा""
👉 अभियोजन पक्ष के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबन्धक, लेखा व प्रशासन वादी मुकदमा राम शरण श्रीवास्तव ने 10 मार्च 2000 को दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि लोहारी टोला स्थित राज सिल्क इण्डस्ट्रीज के पार्टनर राज कुमार कपूर व जयनाथ मिश्रा ने बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से उसकी परवलपुर शाखा (विहार) से चुराया गया कोष ड्राफ्ट संख्या-ओ.एल.000034/6796, जो वास्तव में उसकी उपरोक्त शाखा (बांकाघाट) से निर्गमित नहीं है। इस ड्राफ्ट को उपरोक्त फर्म द्वारा जो उनके पक्ष में है, बैंक आफ बड़ौदा, गोदौलिया शाखा में समाशोधन के माध्यम से संग्रहण के लिए जमा किया गया व जिसका भुगतान इस शाखा द्वारा किया जा चुका है। बाद में नियंत्रण कार्यालय द्वारा ज्ञात हुआ है कि जिस उपरोक्त ड्राफ्ट का भुगतान जो किया गया है, वह खोये हुये कोरे ड्राफ्ट में से है। कोरा ड्राफ्ट जो स्टेट बैंक शाखा बॉकाघाट (बिहार) शाखा से जारी व प्रदर्शित किया गया है वह उपरोक्त शाखा बॉकाघाट से निर्गमित नहीं थी, को छल व प्रतिरूपण करके उक्त ड्राफ्ट को अभियुक्त द्वारा अपने फर्म के बैंक आफ बड़ौदा गौदोलिया शाखा के एकाउन्ट में परिवर्तित कराकर बैंक के प्रति रू.66.550/- की धोखाधड़ी किया गया। आरोपितों ने उक्त चेक की धनराशि विभिन्न तिथियों को लाभार्थ प्राप्त कर तथा कागजातों में छेड़छाड़ करके कूटरचित दस्तावेज तैयार कर व मूल्यवान प्रतिभूमि की कूटरचना कारित की गई। जिसके बाद आरोपित के खिलाफ दशाश्वमेध थाने में धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया था। अदालत ने विचारण के बाद आरोप सिद्ध न होने पर आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।

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