👉तहरीर के अनुसार प्रार्थी शशांक शेखर त्रिपाठी, जो सिविल कोर्ट वाराणसी में अधिवक्ता हैं, 19 मार्च 2026 को सायं लगभग 7:30 बजे माननीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-9 की अदालत में बहस करने के बाद न्यायालय परिसर में नीचे आए। उसी दौरान उन्होंने देखा कि 5-6 अज्ञात व्यक्ति आपस में बातचीत कर रहे थे। बातचीत के दौरान वे कथित रूप से कह रहे थे कि “रजत जायसवाल को मार देना बहुत जरूरी है क्योंकि उसने हमारे लड़कों को जेल भिजवाया है।”
👉अधिवक्ता द्वारा इस पर आपत्ति जताने पर उन व्यक्तियों ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि “यह वकील भी हमारे खिलाफ बहस कर रहा था, इसे भी छोड़ना नहीं है।” विरोध होते ही सभी आरोपी अंधेरे और भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
👉घटना के समय वहां कई पुलिसकर्मी, अधिवक्ता और आम नागरिक मौजूद थे, जिन्होंने भी पूरे घटनाक्रम को देखा। प्रार्थी ने बाद में आरोपियों की तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। उनकी बोली और हावभाव से वे बाहरी (स्थानीय नहीं) प्रतीत हो रहे थे।
👉बताया जा रहा है कि यह मामला गंगा घाट पर धार्मिक आस्था से जुड़े एक संवेदनशील प्रकरण से संबंधित है, जिसमें रजत जायसवाल द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। उसी केस में अधिवक्ता त्रिपाठी द्वारा पुलिस रिमांड का समर्थन किया गया था।
👉इस घटना को न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल माना जा रहा है। वादी की तहरीर पर थाना कैंट पुलिस ने 5-6 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
👉पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
