✍️✍️ पत्नी को एक माह के भीतर ससुराल लौटने और वैवाहिक दायित्व निभाने का निर्देश


वाराणसी।

स्थानीय परिवार न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी को एक महीने के भीतर अपने पति के घर वापस लौटने और दांपत्य जीवन के कर्तव्यों का पालन करने का आदेश दिया है। यह निर्णय 'हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-9' (दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना) के तहत एकपक्षीय सुनवाई के बाद लिया गया। बता दे की पति की ओर से इस मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता राम दुलार प्रजापति द्वारा किया गया।


मामला क्या था?

न्यायालय में प्रस्तुत वाद के अनुसार, दोनों पक्षों का विवाह नवंबर 2014 में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। वैवाहिक जीवन के शुरुआती वर्षों के बाद, पति का आरोप था कि उसकी पत्नी बिना किसी उचित कारण के उसे प्रताड़ित करने लगी और जनवरी 2016 में अपने मायके चली गई। पति ने दावा किया कि उसने कई बार पंचायत और सामाजिक स्तर पर पत्नी को वापस लाने का प्रयास किया, लेकिन वह वापस आने को तैयार नहीं हुई।

 अदालती नोटिस के बावजूद पत्नी उपस्थित नहीं हुई, जिसके कारण मामले की सुनवाई एकपक्षीय (Ex-parte) की गई।

न्यायालय ने साक्ष्यों और हलफनामों के आधार पर पति के पक्ष में डिक्री पारित की। अदालत ने पत्नी को निर्देशित किया कि वह इस आदेश की तिथि से एक माह के भीतर अपने ससुराल जाकर वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू करे।

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