✍️✍️ गंगा में इफ्तार पार्टी विवाद में कोर्ट सख्त: धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में सभी आरोपियों की जमानत खारिज


वाराणसी
के चर्चित गंगा में इफ्तार पार्टी प्रकरण में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़ और आपत्तिजनक गतिविधियों के आरोप में दर्ज मामले में सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।



अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-9, वाराणसी ने थाना कोतवाली में दर्ज एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धारा 298, 299, 196(1)(b), 279, 223(b), 308(5) तथा आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज था।

 क्या है मामला?

प्राथमिकी के अनुसार, गंगा घाट पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसे कृत्य किए गए, जिन्हें धार्मिक मान्यताओं के विपरीत बताया गया। घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

👉सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए जमानत की मांग की। 

👉वहीं, वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ताओ शशांक शेखर त्रिपाठी, राजकुमार तिवारी, राजेश त्रिवेदी एवं आशुतोष शुक्ला ने प्रभावी बहस करते हुए आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया।

👉 अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि:

  • आरोप गंभीर और समाज पर प्रभाव डालने वाले हैं
  • प्रथम दृष्टया साक्ष्य मजबूत हैं
  • जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है

अभियोजन पक्ष ने भी इन तर्कों का समर्थन करते हुए जमानत का विरोध किया।


 कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि: मामले की प्रकृति गंभीर है और वर्तमान परिस्थितियों में जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।

इसी आधार पर सभी आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी गई।

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