✍️✍️ बनारस: चंदापुर नरसंहार के दोषी को फांसी की सजा, एक ही परिवार के चार लोगों की रोंद डाली थी दुनिया
जनपद के चोलापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चंदापुर में 11 साल पहले हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले चौहरे हत्याकांड में अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम/यू.पी.एस.ई.बी.) विनोद कुमार-VI की अदालत ने अभियुक्त रविंद्र उर्फ राजू पटेल को चार लोगों की नृशंस हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।
लोहे के रम्भे से किया था प्रहार
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 29 अक्टूबर 2013 की रात करीब 9:30 बजे की है। मृतक मोहन जायसवाल अपने परिवार के साथ चंदापुर स्थित मकान में रह रहे थे। रात के समय जब मोहन जायसवाल आंगन में गए, तभी गांव के ही रविंद्र उर्फ राजू पटेल ने उन पर लोहे के रम्भे (राड) से हमला कर दिया। बचाव के लिए आए उनके बेटे संदीप, पत्नी झूना देवी, बेटे प्रदीप उर्फ गोलू और बेटी पूजा पर भी राजू ने एक के बाद एक प्राणघातक प्रहार किए। हमले में मोहन, झूना, प्रदीप और पूजा की मौत हो गई, जबकि संदीप गंभीर रूप से घायल हो गया था।
लालटेन गिरने से बची आरती की जान
इस खौफनाक मंजर की चश्मदीद गवाह मृतक की छोटी बेटी आरती जायसवाल बनी। आरती ने अदालत को बताया कि जब वह लालटेन लेकर आंगन में आई, तो राजू उसकी बहन पूजा को मार रहा था। राजू ने आरती की तरफ भी हमला करने का प्रयास किया, लेकिन आरती के हाथ से लालटेन छूटकर गिर गई और आग भभक उठी। इससे घबराकर अभियुक्त पीछे हटा और आरती ने फुर्ती दिखाते हुए खुद को कमरे में बंद कर लिया। कमरे के भीतर से ही आरती ने अपनी चाची को फोन कर घटना की जानकारी दी।
लूट और साक्ष्यों को मिटाने का भी दोषी
पुलिस ने विवेचना के दौरान राजू पटेल को 6 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया था। उसके पास से मृतक का लूटा हुआ मोबाइल फोन बरामद हुआ। साथ ही, उसकी निशानदेही पर घटना के वक्त पहने हुए जले हुए कपड़े और जूतों के अवशेष भी बरामद किए गए थे। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स (IMEI नंबर) के आधार पर पुख्ता चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत का फैसला
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और 18 गवाहों के बयानों के आधार पर राजू पटेल को जघन्य अपराध का दोषी पाया।

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