✍️✍️ 24-year-old case: Bail granted to Sabu Sodium Chloro Ltd. Director


24 साल पुराने मामले में साबू सोडियम क्लोरो लि. के डायरेक्टर को मिली जमानत

""सूर्या ब्रांड नमक के पैकेट पर 'बेस्ट बिफोर' न लिखे होने के कारण दर्ज हुआ था मुकदमा""

वाराणसी की एक स्थानीय अदालत ने लगभग दो दशक पुराने खाद्य अपमिश्रण (PFA) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में 'साबू सोडियम क्लोरो लिमिटेड' के निदेशक मदन सिंह को जमानत दे दी है। यह मामला वर्ष 2001 और 2002 में सूर्या ब्रांड नमक के पैकेट पर 'बेस्ट बिफोर' (उपयोग की समय सीमा) अंकित न होने से संबंधित था।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के विशेषज्ञ अधिवक्ता नितेश कुमार श्रीवास्तव ने पक्ष रखा""

क्या है पूरा मामला?

अदालती दस्तावेजों के अनुसार,👉 पहला मामला 29 जून 2002 का है, जब तत्कालीन खाद्य निरीक्षक उमाशंकर ने चोलापुर क्षेत्र के धरसौना बाजार में एक किराने की दुकान का निरीक्षण किया था। वहां 'सूर्या' ब्रांड के आयोडाइज्ड नमक के नमूने लिए गए थे। जन विश्लेषक (Public Analyst) की जांच में पाया गया कि पैकेट पर खाद्य अपमिश्रण निवारण नियमावली 1955 के नियम-32 के तहत 'बेस्ट बिफोर' तिथि नहीं लिखी थी, जिसे कानूनन मानक के विपरीत माना गया।

👉दूसरा मामला 13 जुलाई 2001 का है। खाद्य निरीक्षक अनिल कुमार कटियार ने फूलपुर क्षेत्र की एक दुकान से इसी ब्रांड के नमक का नमूना लिया था। लखनऊ स्थित प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यहां भी वही तकनीकी खामी (बेस्ट बिफोर तिथि का अभाव) पाई गई थी।


अदालती कार्यवाही

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-01) की अदालत में बचाव पक्ष की ओर से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के विशेषज्ञ अधिवक्ता नितेश कुमार श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। 

👉 जबकि अभियोजन पक्ष द्वारा अपराध की प्रकृति को देखते हुए जमानत का विरोध किया गया। हालांकि, अदालत ने मामले के सभी तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त मदन सिंह (निदेशक, साबू सोडियम क्लोरो लि.) की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।

Post a Comment

Previous Post Next Post