वाराणसी।
जनपद के सुंदरपुर, थाना चितईपुर क्षेत्र में हुई जानलेवा हमले की घटना के आरोपी विक्की सेठ को न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत ने मामले की गंभीरता और चोटों की प्रकृति को देखते हुए अभियुक्त की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान ने पक्ष रखते हुए जमानत याचिका का विरोध किया""
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 28 फरवरी 2026 का है जब वादी पवन कुमार का भतीजा निशु और उसका दोस्त अंशू बीएचयू से घर लौट रहे थे। करौंदी चौराहे पर पहले से घात लगाकर बैठे अमन, बड़का और उनके साथियों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। इस दौरान निशु को जान से मारने की नीयत से चाकू मारा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
चिकित्सीय रिपोर्ट में "जानलेवा" चोट की पुष्टि
👉 सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई। डॉक्टर सुमित शर्मा के बयान के अनुसार, घायल निशु को 5 सेमी चौड़ा गहरा घाव था, जिसके कारण छाती में हवा भर गई थी। (Pneumothorax)। चिकित्सक ने इस स्थिति को "जानलेवा" करार दिया था।
👉 आरोपी विक्की सेठ के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि एफआईआर में उनका नाम नहीं था और उन्हें रंजिश के चलते फंसाया गया है। यह भी दावा किया गया कि वह पिछले एक साल से मुंबई में काम कर रहा था और केवल होली की छुट्टियों में घर आया था।
👉 जबकि अभियोजन पक्ष जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर जानलेवा हमला किया है और अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है।
👉 दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद, सत्र न्यायाधीश ने पाया कि साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त को जमानत देना उचित नहीं है। न्यायालय ने आदेश दिया कि आरोपी विक्की सेठ की जमानत याचिका निरस्त की जाती है।
