वाराणसी।
जनपद के थाना मिर्जामुराद क्षेत्र के अंतर्गत जमीन विवाद को लेकर हुई एक महिला की हत्या के मामले में, सत्र न्यायालय वाराणसी ने मुख्य अभियुक्ता चन्द्रावती देवी उर्फ बन्द्रावती की जमानत याचिका को अपराध की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दिया है।
""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान ने पक्ष रखते हुए जमानत याचिका का विरोध किया""
विवाद और जानलेवा हमला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 17 जनवरी 2026 की है। वादी मुन्ना पटेल की पत्नी सुनीता देवी पर उनके पड़ोसियों विक्रमा, कुलदीप, चन्द्रावती, नीतू और श्रीयांश ने जमीन विवाद के कारण हमला किया। आरोप है कि गाली-गलौज और मारपीट के दौरान सह-अभियुक्त कुलदीप ने जान से मारने की नीयत से सुनीता देवी के सिर पर फावड़े की धार से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उपचार के दौरान अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा
न्यायालय में प्रस्तुत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के सिर पर 36 सेमी लंबा गहरा घाव था और खोपड़ी की हड्डी (फ्रंटोपेरिएटल बोन) में 15 सेमी का फ्रैक्चर पाया गया था। मृत्यु का मुख्य कारण सिर में लगी गंभीर चोट (Cranio-cerebral injury) बताई गई, जो किसी कुंद वस्तु या भारी प्रहार के कारण हुई थी।
👉 अभियुक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वह 68 वर्ष की वृद्ध और बीमार महिला है। उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उनका घटना में कोई सीधा रोल नहीं है।
👉 जबकि अभियोजन पक्ष से सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि फावड़े की धार से वार करना हत्या करने के प्रबल इरादे (Intention) को दर्शाता है। यह एक जघन्य अपराध है और गवाहों ने भी कथानक का समर्थन किया है।
👉 सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है। तथ्यों और परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, न्यायालय ने अभियुक्ता चन्द्रावती देवी की जमानत अर्जी को गुणवत्ता के आधार पर निरस्त करने का आदेश दिया।
