वाराणसी।
जमीन बेचने के नाम पर 81 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपितों को राहत देने से इनकार कर दिया। जिला जज (त्रयोदश) नीरज बख्शी की अदालत ने कुशहा, चुनार (मिर्जापुर) निवासी दो सगे भाइयों आरिफ अहमद उर्फ मोनू और मोहम्मद अहमद उर्फ मुजम्मिज की अग्रिम जमानत अर्जी मामले की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दी।
""अदालत में जमानत अर्जी का जोरदार विरोध वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने किया""
क्या है पूरा मामला?
वादी मुकदमा व अधिवक्ता रविशंकर पटेल के अनुसार, आरोपितों ने चितईपुर क्षेत्र के विश्वकर्मा नगर कॉलोनी स्थित आराजी नंबर 439/1 व 440/1 (मौजा सुसुवाही, तहसील सदर) की जमीन दिखाकर उसे बेचने का सौदा तय किया। विश्वास में लेकर वादी से पहले उसकी जमीन बिकवाई गई और फिर मकान पर लोन दिलवाकर कुल 81 लाख रुपये दिलवा लिए गए, जिसमें 14 लाख नकद और 67 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर के जरिए दिए गए।
आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपितों ने उक्त जमीन किसी अन्य को बेच दी और पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दिया। विरोध करने पर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और हर महीने एक लाख रुपये की कथित रंगदारी मांगने का भी आरोप है।
पुलिस कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर के आदेश पर चितईपुर थाने में दोनों भाइयों समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
