इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में प्रॉपर्टी डीलर और राजनीतिक रूप से सक्रिय शेख अज़दर हुसैन को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला दीवानी विवाद का है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है।
"आवेदक की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में आवेदक के अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह व विजय कुमार सिंह के द्वारा पक्ष रखा गया था"
क्या था पूरा मामला?
आवेदक पर आरोप था कि उसने रामनगर थाने में दर्ज केस (अपराध संख्या 329/2025) के तहत जमीन बेचने के नाम पर 20 लाख रुपये लिए और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। साथ ही, उस पर 10 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग करने और डराने-धमकाने का भी आरोप था। आवेदक 30 दिसंबर 2025 से जेल में बंद था। चूंकि 9/12/2025 से 30/12/2025 मात्र 21 दिन में आवेदक के ऊपर वाराणसी शहर के अलग अलग थानों में 6 FIR दर्ज हुआ था।
अदालत ने क्यों दी जमानत?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर गौर किया:
- 👉 दस्तावेजी साक्ष्य: कोर्ट ने माना कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और साक्ष्य दस्तावेजी हैं, ऐसे में उनके साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है।
- 👉 दीवानी विवाद: अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला मूल रूप से एक दीवानी विवाद (Civil Dispute) है।
- 👉 अन्य मामले: आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि आवेदक को दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया गया है और इसी तरह के अन्य मामलों में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है।
शर्तों के साथ मिली रिहाई
अदालत ने आवेदक को व्यक्तिगत मुचलका और दो विश्वसनीय जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही जमानत के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं:
- 👉 आवेदक सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
- 👉वह किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा।
- 👉वह गवाहों को डराएगा-धमकाएगा नहीं और मुकदमे में सहयोग करेगा।
- 👉उसे निचली अदालत की हर तारीख पर उपस्थित रहना होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत उसकी जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगी।
