✍️✍️ दहेज के लिए विवाहिता की प्रताड़ना और आत्महत्या: पति को 10 वर्ष और सास को 7 वर्ष की कठोर कारावास
वाराणसी।
मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में दहेज की मांग को लेकर हुई विवाहिता की मौत के मामले में वाराणसी की अदालत (एफ.टी.सी., 14वां वित्त आयोग) ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मृतका के पति और सास को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार-द्वितीय की अदालत ने दोनों दोषियों को दहेज हत्या (धारा 304बी) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत कठोर सजा सुनाई है।
""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मुनीब सिंह चौहान व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रवीन्द्र नरायण तिवारी ने पक्ष रखा""
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतका माला प्रजापति का विवाह 16 अप्रैल 2015 को लवकुश प्रजापति के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद से ही पति लवकुश और सास जड़ावती देवी मृतका पर एक लाख रुपये अतिरिक्त दहेज के लिए दबाव बनाने लगे। दहेज न मिलने पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। अंततः, 13 अप्रैल 2017 को माला ने अपने ससुराल में पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
अदालत का फैसला
न्यायालय ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों का गंभीरता से विश्लेषण करते हुए फैसला सुनाया:
- दोषसिद्ध लवकुश प्रजापति (पति): धारा 304बी के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास, तथा अन्य धाराओं में अतिरिक्त सजा और अर्थदंड।
- दोषसिद्ध जड़ावती देवी (सास): धारा 304बी के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास, तथा अन्य धाराओं में अतिरिक्त सजा और अर्थदंड।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और दोषियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। हालांकि, साक्ष्य के अभाव में अदालत ने पति और सास को धारा 302 (हत्या) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
अदालत की टिप्पणी:
फैसले के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि विवाहिता की असामान्य परिस्थितियों में मौत के बाद अभियुक्तों द्वारा पेश किए गए बचाव तर्कों को साक्ष्यों के आधार पर खंडित पाया गया। कानून के तहत ऐसी मौतों में साक्ष्य अधिनियम की धारा 113बी की उपधारणा अभियुक्तों के विरुद्ध रही, जिसे वे संदेह से परे खंडित करने में विफल रहे।
