✍️✍️ 12.5 लाख रुपये के न्यासभंग मामले में राजेश वर्मा दोषी करार
""अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक सत्येन्द्र कुमार सिन्हा ने पक्ष रखा""
क्या था मामला?
शिकायतकर्ता मनोज कुमार, जो अनुसूचित जाति के हैं, ने बताया कि राजेश वर्मा उनकी दुकान पर काम करता था। व्यापार शुरू करने की इच्छा जताने पर, मनोज ने बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर राजेश को 18 लाख रुपये दिए थे। राजेश ने इस राशि से आइसक्रीम फैक्ट्री खोली, लेकिन बाद में पैसे लौटाने में आनाकानी करने लगा।
अदालत का विश्लेषण
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि इकरारनामा और सुलहनामा के दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि अभियुक्त ने कुल 18 लाख रुपये लिए थे, जिसमें से 5.50 लाख रुपये वापस किए गए। शेष 12.50 लाख रुपये वापस नहीं किए गए, जिसे अदालत ने आपराधिक न्यासभंग माना।
अदालत ने कहा कि परिवादी द्वारा अभियुक्त को पैसा देकर एक न्यास का सृजन किया गया था, जिसका पालन अभियुक्त ने नहीं किया।
