✍️✍️ सोना गिरवी रखने और धोखाधड़ी के विवाद में चेतगंज के व्यापारी को मिली अग्रिम जमानत
""50 हजार के मुचलके पर संदीप जायसवाल की अग्रिम जमानत मंजूर, विदेश जाने पर रोक""
वाराणसी।
चेतगंज थाना अंतर्गत जगतगंज निवासी और तेलियाबाग में 'प्रथम ज्वैलर्स' के मालिक संदीप जायसवाल को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-1) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी व्यापारी की अग्रिम जमानत याचिका को कुछ शर्तों के साथ स्वीकार कर लिया है। अदालत ने आरोपी संदीप को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के दो प्रतिभू प्रस्तुत करने पर गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता शशिकांत दुबे, विकास श्रीवास्तव, अंकित दुबे व आलोक सौरभ पाण्डेय ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत वादिनी संगीता खुराना द्वारा पुलिस आयुक्त को दी गई एक लिखित तहरीर से हुई थी। संगीता का आरोप था कि तीन साल पहले उनके पति (दिवंगत खुराना जी) ने बिजनेस में घाटा होने के कारण मुथूट फाइनेंस में अपना सोना गिरवी रखा था। ब्याज न चुका पाने के कारण जब सोने की नीलामी होने वाली थी, तब उन्होंने एक परिचित के माध्यम से संदीप जायसवाल से मदद मांगी। संदीप ने ₹8,37,000 की मदद की और मुथूट फाइनेंस से छूटा 202 ग्राम सोना अपने पास बंधक रख लिया। इसके बाद उसने 2% ब्याज की मांग की। पति की मृत्यु के बाद संगीता ने कुल ₹1,20,5000 ब्याज चुकाया, लेकिन जब उन्होंने अपना सोना वापस मांगा तो संदीप टाल-मटोल करने लगा और उनके साथ अभद्र व्यवहार व बदसलूकी की।
दूसरी ओर,अभियुक्त संदीप जायसवाल के वकील ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी बताया। उनका तर्क था कि दिवंगत सुमेर खुराना संदीप के मित्र थे। संदीप ने उनकी मजबूरी देखकर मुथूट फाइनेंस का कर्ज चुकाने के लिए ₹6,86,649 दिए थे। बाद में सुमेर खुराना ने वह सोना संदीप को बेच दिया, जिसके बदले संदीप ने सोने की बची हुई रकम ₹1,50,000 और सुमेर खुराना को दे दी। सुमेर खुराना की मौत के बाद उनकी पत्नी संगीता ने मजबूरी बताकर संदीप से ₹80,000 उधार लिए। इसमें से उन्होंने केवल ₹15,000 वापस किए और बाकी बचे ₹65,000 न लौटाने पड़ें, इसीलिए पुलिस से मिलकर यह झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अग्रिम जमानत देते हुए अदालत ने आरोपी व्यापारी पर कड़ी शर्तें भी लगाई हैं:
- 👉आरोपी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति या गवाह को डराएगा या धमकाएगा नहीं।
- 👉सक्षम न्यायालय की अनुमति के बिना संदीप भारत देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते।
यदि इन शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो अभियोजन पक्ष को बी.एन.एस.एस. (BNSS) के प्रावधानों के तहत अग्रिम जमानत निरस्त कराने का पूरा अधिकार होगा।
