वाराणसी।
वृद्ध दंपत्ति की सहानुभूति का फायदा उठाकर उनकी जीवनभर की कमाई पर कब्जा करने की कोशिश करने वाली एक महिला को अदालत से बड़ा झटका लगा है। वाराणसी की अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) न्यायालय संख्या-02 की न्यायाधीश पूनम पाठक ने आरोपी कल्पना सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए अपराध को अत्यंत गंभीर करार दिया है।
""बता दे कि अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में फौजदारी अधिवक्ता नदीम अहमद खां और अमित सिंह टिका ने जमानत प्रार्थना पत्र का घोर विरोध किया""
आश्रय देने वालों को ही बनाया निशाना
मामला थाना कैंट क्षेत्र का है। 70 वर्षीय श्यामा सिंह ने अपनी चचेरी भतीजी कल्पना सिंह के विरुद्ध जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि वर्ष 1997 में पति की हत्या के बाद तीन बच्चों के साथ असहाय हुई कल्पना को श्यामा सिंह और उनके पति राजदेव सिंह ने अपने भोजूबीर स्थित मकान में रहने के लिए स्थान दिया था। बाद में जब राजदेव सिंह ने अपने मकान का पंजीकृत दानपत्र पत्नी और पुत्री के नाम कर दिया, तब कल्पना सिंह ने खुद को राजदेव सिंह की पत्नी बताते हुए नगर निगम में आपत्ति दाखिल कर मकान पर दावा ठोक दिया।
जांच में खुली फर्जी शादी की पोल
नगर निगम और पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरोपी महिला ने वर्ष 2000 में राजदेव सिंह से विवाह होने का दावा करते हुए सारनाथ स्थित मंदिर की कथित विवाह रसीदें प्रस्तुत की थीं। जांच में पता चला कि रसीदें अन्य व्यक्तियों के नाम जारी थीं।
पुलिस को महिला के पास से दो आधार कार्ड भी मिले, जिनमें से एक फर्जी पाया गया। इसके अलावा वोटर आईडी और मतदाता सूची में भी पति के नाम के स्थान पर राजदेव सिंह का नाम दर्ज कराया गया था।
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज था असली पति का नाम
जांच में यह भी सामने आया कि कल्पना सिंह आंगनबाड़ी कार्यकत्री है और उसकी सर्विस बुक, बैंक पासबुक, शस्त्र लाइसेंस तथा अन्य सरकारी अभिलेखों में उसके दिवंगत पति रणधीर सिंह का ही नाम दर्ज है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के विरुद्ध थाना शिवपुर में वर्ष 2018 से 2025 के बीच मारपीट, गाली-गलौज, अमानत में खयानत और धमकी जैसे मामलों के चार मुकदमे दर्ज हैं तथा सभी में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। बचाव पक्ष ने महिला होने, उम्र अधिक होने और मामले को दीवानी विवाद बताते हुए जमानत की मांग की, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी ने बुजुर्ग महिला की संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से फर्जी विवाह रसीद, वोटर कार्ड और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनका उपयोग किया। मामले की गंभीरता और विवेचना की स्थिति को देखते हुए आरोपी की जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।