""फेसबुक पर नौकरी ढूंढने के चक्कर में साइबर ठगों के जाल में फंसा था आरोपी; बैंक खाता खुलवाकर ठगों ने किया था ₹1.05 लाख का फ्रॉड""
अलीगढ़।
न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-04), ने नौकरी के नाम पर साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए एक बेकसूर ऑटो ड्राइवर संजय सिंह को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 'सत्येन्द्र कुमार एंटील बनाम सीबीआई' के ऐतिहासिक फैसले को ध्यान में रखते हुए आरोपी/प्रार्थी की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता विजय कुमार सिंह , अखिलेश कुमार पाण्डेय व राजदीप वार्ष्णेय ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
वाराणसी के ग्राम कुरौँना (थाना जंसा) के रहने वाले 41 वर्षीय संजय सिंह वर्ष 2020-21में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण गुजरात के एस्सार स्टील प्लांट में अपनी ड्राइवरी की नौकरी गंवाकर घर लौट आए थे। रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल दर्द) की बीमारी और परिवार के सामने भुखमरी का संकट देख उन्होंने फेसबुक पर ड्राइवर की नौकरी की तलाश शुरू की। इसी दौरान फेसबुक के माध्यम से साइबर ठगों ने खुद को कंपनी का मैनेजर बताकर उन्हें ₹15,000 प्रति माह पर गाड़ी चलाने की नौकरी का झांसा दिया। ठगों ने सैलरी ट्रांसफर करने के नियम का बहाना बनाकर संजय सिंह के आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक में एक नया खाता खुलवा लिया। हालांकि, ठगों ने खाता संबंधी कोई भी प्रपत्र, चेकबुक या एटीएम कार्ड संजय को नहीं दिया और अंगूठा निशान (वेरिफिकेशन) लेकर बैंक से जुड़े सारे अधिकार अपने पास रख लिए।
ठगों ने खाते का किया गलत इस्तेमाल
संजय सिंह के इसी खाते का इस्तेमाल कर ठगों ने अलीगढ़ के मेडिकल रोड निवासी मुस्तफा अकबर के खाते से फर्जी तरीके से ₹1,05,000 की ऑनलाइन निकासी कर ली। पीड़ित मुस्तफा अकबर द्वारा अलीगढ़ के साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें पुलिस ने जांच के बाद खाताधारक होने के नाते संजय सिंह का नाम चार्जशीट (आरोप पत्र) में शामिल कर धारा 420 IPC और 66 आईटी एक्ट के तहत आरोपी बना दिया।
""माननीय उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के विधि व्यवस्था का मिला लाभ""
आरोपी संजय सिंह के अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में दलील दी गई कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं और खुद एक बड़ी धोखाधड़ी (फ्रॉड) का शिकार हुए हैं। न तो उस खाते का संचालन उनके द्वारा किया गया और न ही उसमें कोई रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर उनका था।
अदालत का फैसला
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-04), अलीगढ़ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी संजय सिंह को न्यायोचित आधार पर ₹20,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि की प्रतिभू (जमानत) दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश जारी किया।
