✍️✍️ Fraud of Lakhs in the Name of Getting a Scrap Tender in Railways (BLW); Court Orders Registration of FIR Against Two Fraudsters

 


✍️✍️ रेलवे (BLW) में स्क्रैप टेंडर दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, न्यायालय के आदेश पर दो जालसाजों के खिलाफ FIR दर्ज का आदेश 

""बनारस लोको मोटिव वर्क्स (BLW) का फर्जी अधिकारी बनकर की थी ढाई लाख की धोखाधड़ी""

वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बनारस लोको मोटिव वर्क्स (BLW) में स्क्रैप (कबाड़) का टेंडर दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले को गंभीरता से लिया है। विद्वान अधिवक्ता अवनीश राय, राजन कुमार मांझी और विकास तिवारी के माध्यम से पीड़ित द्वारा धारा 173(4) BNSS के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने सारनाथ थाना प्रभारी को आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।


क्या है पूरा मामला?

प्राप्त विवरण के अनुसार, गाजीपुर (मूल निवासी) और वर्तमान में लोहिया नगर, सारनाथ (वाराणसी) के रहने वाले पीड़ित विवेक चौबे से 22 जुलाई 2024 को विपक्षियों ने संपर्क किया था। विपक्षी संख्या-2 आकर्ष जायसवाल ने विवेक चौबे को सुमित कुमार त्रिपाठी (निवासी: भगवानपुर, लंका) से मिलवाया और उसे BLW का बड़ा अधिकारी बताया।

सुमित कुमार त्रिपाठी ने फर्जी पहचान पत्र और स्क्रैप टेंडर के नकली दस्तावेज दिखाकर पीड़ित को झांसे में ले लिया। उसने दावा किया कि BLW का पूरा स्क्रैप कार्य उसी के अधीन है और टेंडर दिलाने के नाम पर 15,00,000 रुपये (पन्द्रह लाख) की मांग की।


झांसे में आकर दिए पैसे, फिर शुरू हुआ टालमटोल

आरोपियों के झांसे में आकर पीड़ित विवेक चौबे ने अपनी माता प्रमिला चौबे के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (सिधौना, गाजीपुर) के खाते से अलग-अलग तिथियों (जुलाई और अगस्त 2024) में यूपीआई (UPI) के माध्यम से तथा 1,00,000 रुपये नकद सहित कुल ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये) सुमित कुमार त्रिपाठी को दे दिए।

पैसे लेने के बाद जब आरोपियों ने स्क्रैप की आपूर्ति शुरू नहीं की, तो पीड़ित ने BLW कार्यालय जाकर जांच की। वहां पता चला कि सुमित कुमार त्रिपाठी नाम का कोई भी व्यक्ति वहां कार्यरत नहीं है और वे लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे भोले-भाले लोगों को ठगते हैं।


शिकायत करने पर दी जान से मारने की धमकी

धोखाधड़ी का पता चलने पर जब पीड़ित ने अपने रुपये वापस मांगे, तो आरोपियों ने बदनामी और पुलिस कार्रवाई के डर से माफी मांगी और जल्द पैसे लौटाने का वादा किया। सितंबर 2024 में आरोपियों ने ₹23,000 वापस किए, लेकिन शेष ₹2,27,000 डकार गए। इसके बाद जब भी पीड़ित ने तगादा किया, तो आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।


पुलिस ने नहीं सुनी, तो न्यायालय की शरण में पहुंचे पीड़ित

पीड़ित विवेक चौबे ने फरवरी और मार्च 2026 में थाना प्रभारी सारनाथ और पुलिस आयुक्त (कमिश्नरेट वाराणसी) को रजिस्टर्ड डाक के जरिए शिकायती पत्र भेजा था, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पीड़ित की ओर से विद्वान अधिवक्ता अवनीश राय, राजन कुमार मांझी और विकास तिवारी ने माननीय न्यायालय में धारा 173(4) BNSS के तहत न्याय की गुहार लगाई।


न्यायालय का सख्त आदेश

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी (मनीष कुमार-II) ने मामले की गंभीरता और संलग्न साक्ष्यों (यूपीआई ट्रांजैक्शन व डाक रसीदों) को देखते हुए आदेश दिया कि यह प्रकरण संज्ञेय प्रकृति का है। न्यायालय ने सारनाथ पुलिस को आदेशित किया है कि घटना के संबंध में अविलंब प्राथमिकी दर्ज कर मामले की निष्पक्ष व प्रभावी विवेचना सुनिश्चित की जाए।

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