✍️✍️ नाबालिग के अपहरण और शादी के झूठे आरोप के मामले में आरोपी को मिली जमानत
वाराणसी
सत्र न्यायालय वाराणसी ने सारनाथ थाना क्षेत्र से जुड़े एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और विवाह के प्रयास के गंभीर मामले में आरोपी युवक जीत लाल उर्फ जीतू राजभर को जमानत दे दी है। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और पीड़िता के कलमबंद बयान के आधार पर माननीय न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ अपहरण या जबरन भगाने का मामला नहीं बनता है।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता जुनैद जाफरी ने पक्ष रखा""
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी ने थाना सारनाथ में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री 6 जुलाई 2026 की शाम लगभग 8 बजे बिना बताए घर से लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद परिजनों को पड़ोसियों से जानकारी मिली कि आरोपी जीतू राजभर उसे शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। पुलिस ने मामले में धारा 87 व 137(2) BNS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर आरोपी को 8 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत में बचाव पक्ष का पक्ष
सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत में जमानत प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को आपसी रंजिश और गलतफहमी के कारण झूठा फंसाया गया है। आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 8 जुलाई 2026 से लगातार जिला कारागार वाराणसी में निरुद्ध है। जबकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का घोर विरोध किया।
अदालत का फैसला
सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने दोनों पक्षों के तर्कों, केस डायरी और पीड़िता के बयान को ध्यान में रखते हुए आदेश दिया कि आरोपी का जमानत प्रार्थना-पत्र स्वीकार किए जाने योग्य है। अदालत ने 50,000/- रुपये के व्यक्तिगत बंध-पत्र तथा समान राशि के दो प्रतिभू (जमानतदार) प्रस्तुत करने की शर्त पर जीतू राजभर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने आरोपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह विचारण के दौरान किसी भी साक्षी को प्रभावित नहीं करेगा और अदालत में हर निर्धारित तिथि पर उपस्थित रहेगा।
