✍️✍️ Accused Granted Bail in ₹2 Million Fake Trading Fraud Cyber Scam Case


✍️✍️ साइबर ठगी के 20 लाख रुपये के फर्जी ट्रेडिंग फ्रॉड मामले में आरोपी को मिली जमानत

""व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए 20 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला, अपर सत्र न्यायालय वाराणसी ने सशर्त जमानत की मंजूर""

वाराणसी। जनपद वाराणसी के थाना साइबर क्राइम में दर्ज लगभग 20 लाख रुपये की ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-08, वाराणसी के पीठासीन अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने आरोपी शादाब हुसैन की प्रथम जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे सशर्त जमानत प्रदान कर दी।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता नृपेंद्र प्रताप सिंह 'नन्हे', वेंकटेश्वर सिंह, अभय कुमार सिंह, आनंद गुप्ता व सहयोगी अधिवक्ता सुशांत वर्मा, आदर्श सिंह ने पक्ष रखा""

यह आदेश धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से संबंधित मामले में पारित किया गया। न्यायालय ने आरोपी को 1,00,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि के दो सक्षम प्रतिभुओं पर रिहा करने का आदेश दिया।

फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए हुई कथित ठगी

अभियोजन के अनुसार वादी अजय सिंह यादव, निवासी औरंगाबाद (ईंथा), वाराणसी ने 1 सितंबर 2025 को थाना साइबर क्राइम में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश का लालच दिया गया। इसके बाद उन्हें Ketilon App डाउनलोड कराया गया, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से विभिन्न तिथियों में कुल 20 लाख रुपये अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर दिए। बाद में जब उन्होंने अपनी धनराशि वापस मांगनी चाही तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

बचाव पक्ष की दलील

बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि आरोपी शादाब हुसैन पूरी तरह निर्दोष है तथा उसका इस कथित साइबर अपराध से कोई संबंध नहीं है। विद्वान अधिवक्तागण ने बताया कि आरोपी रिलायंस कंपनी में कार्यरत था तथा पीजी का संचालन भी करता था। पुलिस पूछताछ के बहाने उसे बुलाकर गिरफ्तार कर लिया गया। यह भी कहा गया कि न तो उसके नाम से कोई बैंक खाता या मोबाइल नंबर इस मामले से जुड़ा है और न ही एफआईआर में उसका नाम दर्ज था। उसका नाम केवल विवेचना के दौरान बैंक स्टेटमेंट एवं आईपी एड्रेस के आधार पर सामने आया।

अभियोजन ने किया विरोध

सरकारी पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर साइबर अपराध में संलिप्त है और फर्जी ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से वादी से 20 लाख रुपये की ठगी की गई है। ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

न्यायालय ने दी राहत

दोनों पक्षों की दलीलों एवं उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपी 12 जनवरी 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध है। मामले की समस्त परिस्थितियों पर विचार करते हुए अदालत ने प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।

न्यायालय ने आदेश दिया कि आरोपी 1 लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र एवं समान धनराशि के दो प्रतिभू प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए।

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