✍️✍️ फूलपुर: चर्चित मनीष सिंह हत्याकांड के मामले में 3 आरोपीयों की अग्रिम जमानत मंजूर
वाराणसी:
जनपद के फूलपुर थाना क्षेत्र में चर्चित मारपीट और हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने आरोपी पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए आरोपी किशन राजभर, आशीष कुमार और गणेश राजभर की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र को मंजूर कर लिया है। सभी आरोपियों को ₹50,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि के दो प्रतिभू दाखिल करने की शर्त पर राहत दी गई है।
"" अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्तागण श्रीकांत प्रजापति, विनोद यादव व सहयोगी अधिवक्ता शक्ति ने पक्ष रखा ""
क्या था पूरा मामला?
वादी मुकदमा अरुण कुमार सिंह ने फूलपुर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 26 अप्रैल 2026 की रात्रि लगभग 10:00 बजे उनका भतीजा मनीष कुमार सिंह (जो घमहांपुर भरथरा में पत्तल बनाने की फैक्ट्री चलाता है) फैक्ट्री बंद करके अपनी चार पहिया गाड़ी से घर लौट रहा था।
आरोप के मुताबिक, रास्ते में लालचंद प्रजापति के घर के पास पुरानी रंजिश के चलते आशीष राजभर, मनीष राजभर, नागेंद्र प्रजापति और अन्य लोगों द्वारा ईंट-पत्थर से हमला किया गया, जिससे गंभीर चोटें आईं और गले से सोने की चेन गायब हो गई।
पुलिस विवेचना के दौरान किशन राजभर, आशीष कुमार और गणेश राजभर पर मुख्य अभियुक्तों को शरण देने, गाड़ी और पैसे उपलब्ध कराने का आरोप लगाते हुए आरोपी बनाया गया था।
बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें
अभियुक्तो के विद्वान अधिवक्तागण ने न्यायालय में तर्क दिया कि उनके मुक्किल पूर्णतः निर्दोष हैं और घटना से उनका कोई सीधा लेना-देना नहीं है। वे मूल घटना में नामजद नहीं थे, बल्कि विवेचना के दौरान उन्हें केवल रिश्तेदारी व रंजिश के चलते इस मुकदमे में फंसाया गया है। अभियुक्तगण का पूर्व का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है, जिसके मद्देनजर अदालत से अग्रिम जमानत का लाभ देने की प्रार्थना की गई।
अदालत द्वारा दी गई मुख्य शर्तें
न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए शर्तो के अधीन जमानत मंजूर की, आदेश मे कहा कि अभियुक्तगण गवाहों को किसी भी प्रकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं करेंगे। वे मुकदमे की कार्यवाही में पूर्ण सहयोग करेंगे और प्रत्येक तिथि पर स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में उपस्थित रहेंगे। वे लगाए गए आरोप की प्रकृति के या अन्य किसी भी नए अपराध में संलिप्त नहीं होंगे।
