✍️✍️ जमीन विवाद में आटा चक्की संचालक की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को उम्रकैद
वाराणसी। फूलपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बरवां (मलहथ) में जमीन और रास्ते के पुराने विवाद को लेकर वर्ष 2020 में हुई आटा चक्की संचालक की हत्या के बहुचर्चित मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मुख्य आरोपी शिवकुमार मिश्रा को हत्या का दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास तथा 10,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, साक्ष्य के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए अन्य पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
""अदालत में वादी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता हरिशंकर सिंह व सहयोगी फौजदारी अधिवक्ता मिथिलेश मिश्रा ने पक्ष रखा""
अभियोजन के अनुसार, 19 मई 2020 की शाम लगभग छह बजे ग्राम बरवां (मलहथ) स्थित वादी पक्ष की तेल पेरने एवं आटा चक्की की मशीन पर पुरानी जमीन और रास्ते के विवाद को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। आरोप था कि विपक्षी पक्ष लाठी, रॉड और सब्बल से लैस होकर पहुंचा और हमला कर दिया। इस घटना में अनिल कुमार मिश्रा (43 वर्ष), उनके पुत्र पवन मिश्रा तथा पत्नी सुनीता मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिंडरा और बाद में कबीरचौरा अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में अनिल कुमार मिश्रा की मृत्यु हो गई।
घटना के संबंध में वादी सचिन कुमार मिश्रा की तहरीर पर थाना फूलपुर में मु0अ0सं0 137/2020 के तहत धारा 147, 148, 149, 302, 34, 504 एवं 506 भारतीय दंड संहिता में मुकदमा दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सीय साक्ष्य तथा प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान का विस्तृत परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त शिवकुमार मिश्रा ने सब्बल से मृतक के सिर के पिछले हिस्से और गर्दन पर गंभीर प्रहार किया, जिसके कारण गंभीर चोट लगने से वह कोमा में चले गए और उनकी मृत्यु हो गई। न्यायालय ने इसे अभियोजन द्वारा संदेह से परे सिद्ध माना।
हालांकि, अन्य अभियुक्त महेन्द्र मिश्रा, दीपक मिश्रा, धीरज मिश्रा, दशरथ मिश्रा एवं साक्षी मिश्रा के विरुद्ध प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में पर्याप्त सामंजस्य न मिलने तथा अभियोजन द्वारा आरोप संदेह से परे सिद्ध न कर पाने के कारण उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। साथ ही न्यायालय ने धारा 147, 148, 149, 504 एवं 506 के आरोप भी सिद्ध न होने के कारण निरस्त कर दिए। सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय ने दोषी शिवकुमार मिश्रा को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, वाराणसी भेजने का आदेश दिया।
