✍️✍️ Bloody conflict over demanding wages: Varanasi court delivers verdict, siblings sentenced


✍️✍️ मजदूरी मांगने पर खूनी संघर्ष: वाराणसी कोर्ट ने सुनाया फैसला, भाई-बहन को सजा

वाराणसी:

करीब 24 साल पुराने मारपीट के एक मामले में वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई। चोलापुर थाना क्षेत्र के अगनड्या गांव में मजदूरी के 15,000 रुपये मांगने पर युवक के साथ लाठी-डंडों से बेरहमी से मारपीट की गई थी। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए भाई-बहन को सजा सुनाई है।

""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से वादी के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्रा, दीपक राकेश दुबे, सत्येंद्र राय, सुरेंद्र प्रताप सिंह व सहयोगी अधिवक्ता नावेद अहमद एवं अभियोजन अधिकारी प्रदीप कुमार सरोज ने पक्ष रखा""

क्या था मामला?

मामला वर्ष 2002 का है। पीड़ित रामचन्दर चौहान, जो अभियुक्त के पिता अर्जुन चौहान के साथ मुंबई में मजदूरी का काम करता था, ने अपनी मेहनत की कमाई के 15,000 रुपये मांगे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 31 अगस्त 2002 की रात जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो जितेन्द्र और उसके परिवार ने न केवल पैसे देने से इनकार कर दिया, बल्कि उसे भद्दी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान जितेन्द्र ने लाठी से हमला कर दिया, जिससे रामचन्दर के बाएं हाथ की मेटाकार्पल हड्डी टूट गई। इस हमले में उसकी बहन सविता ने भी ईंट-पत्थर और लात-घूंसों से मारपीट की थी।

अदालत का सख्त रुख

अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद यह निर्णय लिया। हालांकि, अदालत ने धारा 504 और 506 के तहत अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया, लेकिन धारा 323 और 325 के तहत गंभीर अपराध के लिए दोषी माना।

बता दे कि अभियुक्त जितेन्द्र चौहान को धारा 323 के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना और धारा 325 के तहत 6 महीने का कारावास व 5,000 रुपये का अर्थदंड और अभियुक्ता सविता को धारा 323 के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना व जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को 10-10 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायाधीश ईश्वर शरण कन्नौजिया ने फैसला सुनाते हुए दोषियों को जेल भेज दिया। इस मामले में तीसरी अभियुक्त राजदेई की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो गई थी।

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