✍️✍️ पत्नी की मौत के बाद नवजात का अपहरण और करोड़ों की चोरी, कोर्ट ने दिए FIR दर्ज करने के आदेश
वाराणसी।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में एक दिल दहला देने वाला और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति की पत्नी की प्रसव के बाद मौत क्या हुई, ससुराल पक्ष के लोगों ने कथित तौर पर न केवल उसके नवजात बच्चे का जबरन अपहरण कर लिया, बल्कि घर में रखे लाखों रुपये कैश, सोने के जेवरात और कीमती सामान पर भी हाथ साफ कर दिया। इतना ही नहीं, मृतका की करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए एक फर्जी वसीयतनामा भी तैयार कर लिया गया। इस गंभीर मामले में संज्ञान लेते हुए वाराणसी के न्यायालय अपर सिविल जज (सी०डी०)/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लालपुर/पाण्डेयपुर थाना प्रभारी को आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश जारी किया है। बता दे कि पीड़ित ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी के जरिए न्यायालय के समक्ष 173 (4) BNSS का प्रार्थना पत्र दाखिल था।
क्या है पूरा मामला?
अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र के अनुसार, विपिन कुमार पाण्डेय (निवासी: सोएपुर, वाराणसी) की शादी 28 नवंबर 2012 को दीपिका पाण्डेय के साथ हुई थी। विपिन कुमार सेठ आनंद राम जयपुरिया स्कूल, हरहुआ में संचालन प्रमुख (ऑपरेशन हेड) हैं, जबकि उनकी पत्नी दीपिका राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज, भाईहान (मिर्जापुर) में भूगोल की प्रवक्ता थीं। शादी के लंबे समय बाद, आपसी सहमति से कृत्रिम तरीके (IVF) से गर्भधारण के बाद 1 फरवरी 2025 को दीपिका ने एक बेटे को जन्म दिया। लेकिन दुर्भाग्यवश, इलाज के दौरान मेदांता अस्पताल, लखनऊ में 10 फरवरी 2025 को दीपिका की मृत्यु हो गई।
पीड़ित विपिन कुमार के अनुसार, वह अभी पत्नी की मौत के सदमे में ही थे कि उनकी साली रेखा पाण्डेय बिना उनकी सहमति के उनके नवजात बेटे को जबरन अपने साथ लेकर चली गई। जब पीड़ित ने कुछ दिनों बाद अपने बच्चे को वापस मांगा, तो आरोपी पक्ष ने बच्चा लौटाने से साफ इनकार कर दिया।
आरोप है कि 15 फरवरी 2025 को जब पीड़ित घर पर नहीं था, तब आरोपियों ने सोएपुर स्थित उनके आवास का ताला तोड़कर अलमारी में रखे ₹5,000 नगद कैश,सोने के आभूषण, कीमती गैजेट्स, बैंक व लॉकर की चाबियां और मृतका के इलाज से जुड़े जरूरी कागजात चोरी कर लिए। यह पूरी घटना घर के सामने लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई, जिसका साक्ष्य कोर्ट में पेश किया गया है।
पीड़ित को तब गहरा झटका लगा जब उसे पता चला कि उसकी साली रेखा पाण्डेय ने मृतका दीपिका पाण्डेय के नाम पर एक फर्जी नोटरिएल वसीयतनामा (दिनांक 20-01-2025) तैयार करवा लिया है। इस फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर आरोपी ने मृतका के विभिन्न बैंक खातों, इंश्योरेंस पॉलिसी की धनराशि और लॉकर में रखे जेवरात को हासिल करने के लिए अदालत में 'लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (वाद संख्या 228 सन् 2025) भी दाखिल कर दिया।
दस्तावेजों के अवलोकन से यह साफ हुआ कि जिस तारीख (20 जनवरी 2025) को यह कथित वसीयतनामा बनना दिखाया गया है, उस समय दीपिका पाण्डेय गंभीर स्थिति में जेन हॉस्पिटल (IMS, BHU) के महिला चिकित्सालय में भर्ती थीं। सबसे बड़ी संदिग्ध बात यह रही कि जो दीपिका पाण्डेय हमेशा अपने हर आधिकारिक और बैंक दस्तावेज़ पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर करती थीं, उस कथित वसीयत पर उनके अंगूठे का निशान लगाया गया था। साथ ही वसीयत में मृतका के पति (विपिन) और उनके नवजात बच्चे का कोई जिक्र तक नहीं था, जिससे साफ जाहिर होता है कि संपत्ति हड़पने के लिए यह कूटरचित वसीयत बनाई गई थी।
अदालत का सख्त रुख
मामले की गंभीरता, दिए गए शपथ पत्र और सीसीटीवी साक्ष्यों को देखने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (भावना भारती) ने माना कि यह एक संज्ञेय और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसकी पुलिस जांच बेहद जरूरी है।
न्यायालय ने धारा 173(4) BNSS के तहत निर्देश देते हुए लालपुर/पाण्डेयपुर पुलिस को आदेश दिया है कि आरोपियों के खिलाफ तत्काल संबंधित धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय सुनिश्चित किया जाए।
