✍️✍️ मादक पदार्थ (अल्प्राजोलम) तस्कर को 10 वर्ष का कठोर कारावास व 1 लाख रुपये का जुर्माना
वाराणसी। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश यजुवेन्द्र विक्रम सिंह की अदालत ने नशीला पाउडर (अल्प्राजोलम) रखने और तस्करी करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अभियुक्त करन सिंह (निवासी: ग्राम-बसहरा, थाना-बरसठी, जिला-जौनपुर) को दोषी करार दिया है। अदालत ने अभियुक्त को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये) के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
घटना की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला थाना जी.आर.पी. कैंट, वाराणसी से जुड़ा है। दिनांक 15 मई 2023 को रेलवे स्टेशन कैंट के प्लेटफार्म नं. 1 के पूर्वी छोर पर पुलिस बल (उ.नि. रामदवर यादव व हमराह) तथा आर.पी.एफ. कर्मियों (ASI आनन्द सिंह व प्रमोद कुमार यादव) द्वारा संयुक्त रूप से चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था।
इसी दौरान मुखबिर खास से सूचना मिली कि एक शातिर किस्म का अपराधी यात्रियों से मेल-जोल बढ़ाकर उनकी खाने-पीने की वस्तुओं में नशीला पाउडर मिलाकर उन्हें बेहोश कर देता है और उनके कीमती सामान चुरा लेता है। सूचना के आधार पर पुलिस ने न्यू यात्री हॉल के पीछे घेराबंदी कर संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा, जिसने पूछताछ में अपना नाम करन सिंह बताया।
बरामदगी और विधिक कार्रवाई
तलाशी के दौरान अभियुक्त के दाहिने हाथ में लिए पॉलीथीन से 120 ग्राम सफेद रंग का नशीला पाउडर (अल्प्राजोलम) बरामद किया गया। मौके पर ही नियमानुसार तौल, नमूना संकलन (10-10 ग्राम के दो नमूने) तथा फर्द बरामदगी तैयार की गई।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में बरामद पदार्थ का 'अल्प्राजोलम' होना प्रमाणित हुआ। केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार अल्प्राजोलम की वाणिज्यिक मात्रा 100 ग्राम निर्धारित है, स्पष्ट है कि अभियुक्त के पास से बरामद मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से अधिक थी।
अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (SPP) अरविन्द कुमार श्रीवास्तव एवं सुनील कुमार सिंह ने सशक्त व प्रभावी पैरवी की। प्रस्तुत साक्ष्यों एवं तर्कों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को NDPS एक्ट की धारा 8/22(c) के तहत दोषी पाया।
अदालत का आदेश
निर्णय में अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराध आम नागरिकों के स्वास्थ्य और रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। अदालत ने अभियुक्त को धारा 8/22(c) एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास, 1 लाख रुपये के अर्थदंड और अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्त द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि मूल सजा में समायोजित की जाएगी।
