✍️✍️ Father-in-law, mother-in-law, and brother-in-law granted bail in dowry harassment and assault case


✍️✍️ दहेज उत्पीड़न व मारपीट के मामले में ससुर, सास और जेठ को मिली जमानत

वाराणसी। 

सारनाथ थाना क्षेत्र में दर्ज दहेज उत्पीड़न, मारपीट और धमकी से जुड़े एक मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) वाराणसी की अदालत ने आरोपित ससुर, सास और जेठ को जमानत प्रदान कर दी। न्यायालय ने प्रत्येक अभियुक्त को 20,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि की एक-एक प्रतिभूति प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता जुनैद जाफरी ने पक्ष रखा""

यह मामला थाना सारनाथ से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, 352, 351(3) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में राजकुमार सेठ, रेखा देवी एवं अभिषेक सेठ की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।

वादिनी ने लगाए गंभीर आरोप

वादिनी ममता पटेल, पुत्री बाल किषुन पटेल एवं पत्नी आकाश सेठ, ने सारनाथ थाना तथा पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी के जन शिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आकाश सेठ ने प्रेम संबंध स्थापित कर विवाह का आश्वासन दिया और बाद में 1 मई 2019 को भदोही स्थित दुर्गा माता मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया।

वादिनी का आरोप है कि विवाह के बाद पति आकाश सेठ, ससुर राजकुमार सेठ, सास रेखा देवी और जेठ अभिषेक सेठ ने 6 लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर लगातार मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गर्भधारण के दौरान तीन बार गर्भनिरोधक दवा देकर गर्भपात कराया गया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे घर से निकाल दिया गया।

वादिनी के अनुसार, 2 मई 2025 को जब वह अपने ससुराल पतेरवा पहुंची तो आरोपियों ने दहेज की मांग दोहराते हुए उसके साथ अभद्र व्यवहार किया, मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी देकर घर से बाहर निकाल दिया।

बचाव पक्ष ने बताया झूठा मुकदमा

जमानत सुनवाई के दौरान अभियुक्तों के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें पारिवारिक विवाद के कारण झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि अभियुक्त जांच में सहयोग करने को तैयार हैं तथा उनके फरार होने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है।

वहीं, अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया और प्रार्थना पत्र निरस्त करने की मांग की।

न्यायालय ने दी जमानत

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी मनीष कुमार-द्वितीय ने मामले के तथ्यों, आरोपों की प्रकृति तथा उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करते हुए अभियुक्त राजकुमार सेठ, रेखा देवी एवं अभिषेक सेठ को 20-20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र एवं समान धनराशि की एक-एक प्रतिभूति प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया।

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