✍️✍️वाराणसी में सोनम वांगचुक के आंदोलन और जंतर-मंतर की घटना पर गरमाई सियासत: अधिवक्ताओं के दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों ने प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी:
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के आंदोलन और उसके बाद हुए घटनाक्रम को लेकर वाराणसी में अधिवक्ताओं, नागरिकों तथा सामाजिक संगठनों की सक्रियता तेज हो गई है। इस सिलसिले में वाराणसी में अधिवक्ताओं के दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों ने जिला प्रशासन के माध्यम से अपनी-अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति और शासन-प्रशासन को संबोधित ज्ञापन सौंपा है। दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए मुद्दों ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है।
पहला पक्ष: सोनम वांगचुक के समर्थन और पुलिस कार्रवाई के विरोध में ज्ञापन
पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधियों ने एसीएम-द्वितीय कर्मवीर को महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
प्रमुख मांगें और आरोप:
- लाठीचार्ज की निंदा: ज्ञापन में 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों पर दिल्ली पुलिस व सुरक्षा बलों द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
- स्वास्थ्य जांच: सोनम वांगचुक की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए न्यायिक निगरानी में विशेषज्ञ चिकित्सकों से विस्तृत जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई।
- नैतिक जिम्मेदारी/बर्खास्तगी: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए निष्पक्ष जांच के लिए उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग उठाई गई।
- दोषियों पर कार्रवाई व मुकदमे वापसी: लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों और सादे कपड़ों में मौजूद लठैतों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई कर देश से बिना शर्त माफी मांगने तथा आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
दूसरा पक्ष: राष्ट्रीय सुरक्षा और उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर ज्ञापन
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) श्री विजय त्रिपाठी ने अधिवक्ताओं के एक अन्य प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन प्राप्त किया।
प्रमुख मांगें और आरोप:
- उच्च स्तरीय जांच की मांग: भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ (काशी क्षेत्र) के संयोजक एवं दि बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठ के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में 17 जुलाई 2026 से इस प्रकरण पर विधिक कार्रवाई की मांग दोहराई गई।
- अराजकता का आरोप: वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी और राजस्व बार के संरक्षक जितेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन के दौरान अराजक तत्वों ने प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास क्षेत्र की घेराबंदी और संसद की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया।
विदेशी फंडिंग और साजिश की जांच:
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की समयबद्ध जांच हो और यदि इसमें किसी सुनियोजित साजिश, विदेशी या अवैध वित्तीय सहयोग की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों व संगठनों पर कठोर विधिक कार्रवाई की जाए। इस दौरान आशुतोष शुक्ला, आशुतोष सक्सेना, मोनी श्रीवास्तव, दीपक वर्मा, गुलशन मिश्रा, सौरभ मिश्रा और सुजीत कुमार सिंह पटेल सहित काफी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों के ज्ञापनों को नियमानुसार संबंधित उच्च स्तर पर प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
