✍️✍️ Husband and mother-in-law sentenced to 8 years of rigorous imprisonment in dowry death and harassment case


✍️✍️ दहेज हत्या और प्रताड़ना मामले में पति और सास को 8 साल की कठोर कारावास की सजा

वाराणसी सत्र न्यायालय ने बहुचर्चित दहेज हत्या और प्रताड़ना के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति और सास को दोषी करार दिया है. सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने भारतीय दंड संहिता और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोनों दोषियों को कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है.

""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान ने पक्ष रखा""

क्या था पूरा मामला?

वादी लल्लन प्रसाद ने थाना कैंट, वाराणसी में 5 सितंबर 2010 को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, उन्होंने अपनी पुत्री राधिका देवी का विवाह 8 दिसंबर 2004 को सूरज जायसवाल (पुत्र रघुनाथ प्रसाद जायसवाल, निवासी- हुकुलगंज, थाना कैंट, वाराणसी) के साथ किया था. विवाह के बाद से ही पति सूरज जायसवाल, ससुर रघुनाथ प्रसाद, सास किरण देवी, और ननदें (कविता व बबीता) दहेज में एक मोटरसाइकिल और 50,000 रुपये नकद की मांग को लेकर राधिका को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे. मृतका के संतान न होने पर उसे 'बांझ' कहकर ताने भी दिए जाते थे. आखिरकार, 5 सितंबर 2010 को दहेज की मांग पूरी न होने के कारण ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा राधिका की हत्या कर दी गई, जिसके शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे.

अदालत का फैसला और सजा:

मामले की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने धारा 304B I.P.C. (दहेज हत्या) के तहत दोषी पाया जिसमें आरोपी सूरज जायसवाल (पति) और किरण देवी (सास) प्रत्येक को 8 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई. वही धारा 498A I.P.C. के तहत दोषी पाया और प्रत्येक को 1 वर्ष का कठोर कारावास और ₹1,000/- का जुर्माना सुनाया गया. जुर्माना न देने पर 1 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. और धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रत्येक को 1 वर्ष का कठोर कारावास और ₹1,000/- का जुर्माना का आदेश दिया. जुर्माना अदा न करने पर 1 महीने का अतिरिक्त कारावास होगा.

अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा पूर्व में काटी गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा. न्यायालय के आदेश के बाद दोषियों के खिलाफ कनविक्शन वारंट तैयार कर जिला जेल, वाराणसी भेज दिया गया।

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