✍️✍️ Order directing husband to pay ₹10,000 per month as interim maintenance to wife upheld; husband's appeal dismissed

 


✍️✍️ पत्नी को ₹10,000 प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश बरकरार, पति की अपील खारिज

वाराणसी के अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश यजुवेन्द्र विक्रम सिंह ने पत्नी के अंतरिम भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा पारित आदेश विधिसम्मत एवं न्यायोचित है तथा उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

""अदालत में पत्नी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्तागण विकास गुप्ता,अजीतेष ओझा व राजीव रंजन ने पक्ष रखा""

यह आदेश दाण्डिक अपील में पारित किया गया, जिसमें पति ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी को दिए गए अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को चुनौती दी थी।

मैट्रिमोनियल साइट से हुई थी शादी, बाद में बढ़ा विवाद

अभिलेखों के अनुसार, परिवादिनी का विवाह 15 दिसंबर 2018 को मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से वेदान्त कटियार के साथ हुआ था। विवाह समारोह पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख किया गया है। विवाह के बाद पत्नी ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष द्वारा दहेज एवं अन्य मांगों को लेकर मानसिक प्रताड़ना दी गई, जिसके चलते उन्होंने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा-12 के अंतर्गत वाद दाखिल किया।

निचली अदालत ने दिया था अंतरिम भरण-पोषण का आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान अपर सिविल जज (सी.डी.)/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी ने अधिनियम की धारा-23 के तहत प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र पर विचार करते हुए 17 फरवरी 2025 को पति को पत्नी के पक्ष में ₹10,000 प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया था।

पति ने अपील में उठाए ये तर्क

अपीलकर्ता की ओर से न्यायालय में कहा गया कि पत्नी उच्च शिक्षित हैं तथा एम.ए., बी.एड. एवं पीएचडी की डिग्री धारक हैं। उनका दावा था कि पत्नी पूर्व में विभिन्न कंपनियों में अच्छे वेतन पर कार्य कर चुकी हैं और स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्हें अंतरिम भरण-पोषण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

इसके अतिरिक्त पति ने यह भी दलील दी कि उनके ऊपर वृद्ध माता-पिता तथा तलाकशुदा बहन के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है, जिसे भी न्यायालय को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अदालत ने निचली अदालत के आदेश को माना सही

दोनों पक्षों की दलीलों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं संपूर्ण अभिलेख का अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश यजुवेन्द्र विक्रम सिंह ने पाया कि निचली अदालत द्वारा पारित आदेश विधिक दृष्टि से पूर्णतः उचित है। न्यायालय ने कहा कि आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि या ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे उसमें हस्तक्षेप किया जाए।

इसी के साथ न्यायालय ने दाण्डिक अपील को निरस्त करते हुए 17 फरवरी 2025 के अंतरिम भरण-पोषण संबंधी आदेश की पुष्टि कर दी।

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