✍️✍️ बड़ा फैसला: पैमाइश और बन्दोबस्ती नक्शे के विवाद में निचली अदालत का आदेश निरस्त, निगरानी याचिका स्वीकार
""विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट) सुधाकर राय की अदालत का एक वाद में अहम निर्णय; नक्शे के अनुसार नए सिरे से अमीन सर्वे कराने का दिया निर्देश""
वाराणसी:
जनपद के वाराणसी सिविल न्यायालय से भूमि विवाद और पैमाइश के मामलों में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट) सुधाकर राय की अदालत ने सिविल निगरानी (राजकुमार पटेल बनाम लालमणि सिंह व अन्य) में सुनवाई करते हुए निचली अदालत (सिविल जज जूनियर डिवीजन) के दिनांक 05.03.2024 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत वादी के प्रार्थना पत्र (प्रार्थना पत्र संख्या-38ग) को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने निगरानीकर्ता राजकुमार पटेल की याचिका को स्वीकार करते हुए विवादित भूमि की पैमाइश और बन्दोबस्ती नक्शे के मिलान हेतु नए सिरे से आवश्यक विधिक कार्रवाई करने का आदेश पारित किया है।
""अदालत में निगरानीकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकाश गुप्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश प्रसाद गुप्ता ने पक्ष रखा""
प्रकरण के अनुसार, मूल वाद सिविल जज (जू.डि.) वाराणसी के न्यायालय में विचाराधीन है। इस वाद में निगरानीकर्ता/वादी राजकुमार पटेल द्वारा अपनी पैतृक भूमि की सही स्थिति और सीमाओं के निर्धारण के लिए प्रार्थना पत्र संख्या-38ग प्रस्तुत किया गया था। वादी का मुख्य तर्क था कि मौके पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए बन्दोबस्ती नक्शे के आधार पर अमीन से पैमाइश कराया जाना न्यायसंगत एवं आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित स्थल और पक्षकारों की जमीनों के बीच कोई डाढ़ा (मेड़) है या नहीं।
"अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विवादित आराजी के संबंध में पूर्व में प्रस्तुत अमीन रिपोर्ट (कमीशन रिपोर्ट 20ग) अधूरी और त्रुटिपूर्ण थी। नक्शे के अनुसार सही मिलान किए बिना मामले का सही निस्तारण संभव नहीं है।"
निचली अदालत द्वारा पूर्व में दिनांक 05.03.2024 को वादी के प्रार्थना पत्र संख्या-38ग को तकनीकी ग्राउंड पर निरस्त कर दिया गया था, जिसके खिलाफ निगरानीकर्ता ने सत्र न्यायालय में सिविल निगरानी याचिका दाखिल की थी। निगरानी याचिका में यह तर्क दिया गया कि निचली अदालत ने अपने निहित क्षेत्राधिकार का दुरुपयोग किया है और विधि विरुद्ध तरीके से आदेश पारित किया है, जिससे निगरानीकर्ता को अपूर्णीय क्षति हुई है।
अदालत ने पत्रावली के समस्त साक्ष्यों, तर्कों एवं नक्शों का गहन अवलोकन करने के पश्चात यह पाया कि न्याय हित में विवादित संपत्ति का बन्दोबस्ती नक्शे से सही मिलान और पैमाइश कराया जाना अतिआवश्यक है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बिना सर्वे कराए वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती। तदनुसार, अदालत ने सिविल निगरानी को स्वीकार करते हुए दिनांक 05.03.2024 के आदेश को अपास्त कर दिया और ट्रायल कोर्ट को निर्देशित किया कि प्रार्थना पत्र संख्या-38ग पर पुनः सुनवाई कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई और अमीन सर्वे सुनिश्चित कराया जाए।
