✍️✍️ अपील मे जमानत मंजूर, किशोर न्याय बोर्ड ने किया था निरस्त
वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए किशोर न्याय बोर्ड (जे.जे.बी.), वाराणसी द्वारा नाबालिग (अभि-अपचारी) की जमानत याचिका निरस्त किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए नाबालिग को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता जुनैद जाफरी ने पक्ष रखा""
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 12 के प्रावधानों तथा मामले में उपलब्ध सामाजिक अन्वेषण आख्या का समुचित परीक्षण करने पर यह प्रतीत होता है कि किशोर न्याय बोर्ड द्वारा पारित जमानत निरस्तीकरण का आदेश विधिक कसौटी पर टिकाऊ नहीं है। इसलिए बोर्ड का दिनांक 09 जून 2026 का आदेश अपास्त (निरस्त) किया जाता है।
मामला वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र से संबंधित है। अपीलकर्ता की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि प्रथम सूचना, पुलिस विवेचना तथा गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि नाबालिग को आपसी रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है तथा उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि उसे निरुद्ध रखा जाए।
अदालत ने मामले के समस्त अभिलेख,सामाजिक-मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट, गवाहों के कथनों एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद पाया कि नाबालिग को जमानत का लाभ दिए जाने से न्याय या समाज के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की कोई ठोस संभावना नहीं है।
न्यायालय ने आदेश दिया कि नाबालिग को उसके प्राकृतिक संरक्षक (पिता) के सुपुर्द किया जाए। इसके लिए संरक्षक को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि की दो सक्षम प्रतिभू ज़मानतें प्रस्तुत करनी होंगी। साथ ही संरक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि किशोर भविष्य में किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न हो तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करे।
