✍️✍️ Anticipatory bail granted simultaneously to 10 farmers of Chaubepur in a land agreement case worth ₹90 lakh



✍️✍️ ₹90 लाख के जमीन सट्टा से संबंधित केस में चौबेपुर के 10 काश्तकारों को एक साथ मिली अग्रिम जमानत

वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र से जुड़े चर्चित जमीन विवाद एवं कथित धोखाधड़ी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-03) की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए 10 अभियुक्तों को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। पीठासीन अधिकारी प्रज्ञा सिंह-I की अदालत ने अभियुक्त राजकुमार, फूलचन्द, मूलचंद, धर्मेन्द्र, सतीष, राधा देवी, सोनाऊ, सुरेन्द्र, टुनटुन तथा बबलू की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्तागण ओम प्रकाश यादव, मनीष मिश्रा व राजेश यादव ने पक्ष रखा ""

जमीन के इकरारनामे को लेकर दर्ज हुआ था मुकदमा

अभियोजन के अनुसार, थाना चौबेपुर में 21 फरवरी 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(2) एवं 351(2) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मौजा संदहा, परगना शिवपुर, तहसील सदर, जनपद वाराणसी स्थित आराजियात संख्या 586/2, रकबा 0.0625 हेक्टेयर भूमि के संबंध में 1 अगस्त 2022 को उप निबंधक चतुर्थ, वाराणसी के समक्ष पंजीकृत इकरारनामा (सट्टा) किया गया था।

इकरारनामे के अनुसार भूमि का कुल मूल्य 90 लाख रुपये निर्धारित किया गया था, जिसमें 20 लाख रुपये चेक के माध्यम से अग्रिम भुगतान किए गए थे, जबकि शेष 70 लाख रुपये बैनामा के समय अदा किए जाने थे। वादी का आरोप था कि अग्रिम धनराशि प्राप्त करने के बावजूद न तो भूमि का कब्जा दिया गया और न ही बैनामा निष्पादित किया गया।

बचाव पक्ष ने बताया सिविल विवाद

अभियुक्तों की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि वे आज भी भूमि का बैनामा करने के लिए तैयार हैं तथा वादी शेष धनराशि का भुगतान कर कभी भी बैनामा प्राप्त कर सकता है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि विवाद पूरी तरह दीवानी प्रकृति का है, जिसे आपराधिक स्वरूप देकर मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही अभियुक्तों का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है।

न्यायालय ने दी अग्रिम जमानत

दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया विवाद सिविल प्रकृति का प्रतीत होता है तथा आरोप ऐसे अपराधों से संबंधित हैं, न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

Post a Comment

Previous Post Next Post