✍️✍️ करोड़ों की पैतृक संपत्ति हड़पने और फर्जीवाड़े के आरोप में भाई को झटका, अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
वाराणसी। करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक संपत्ति, भवनों और विद्यालय के स्वामित्व को लेकर चल रहे चर्चित विवाद में वाराणसी की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी शैलेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को सुनवाई के उपरांत खारिज कर दिया। मामला थाना भेलूपुर, वाराणसी में दर्ज एक मुकदमा से संबंधित है।
""अदालत में वादिनी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय गेठे पक्ष रखते हुए अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का घोर विरोध किया ""
अभियोजन के अनुसार, वादिनी ने आरोप लगाया है कि माता-पिता के निधन के बाद आरोपी ने फर्जी एवं कूटरचित अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा जाली हस्ताक्षरों का उपयोग कर करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक संपत्तियों—भवन संख्या बी.24/70, बी.24/70ए एवं बी.24/64 तथा एक विद्यालय—पर अकेले अपना नाम दर्ज कराकर संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और उसे हड़पने का प्रयास किया।
दूसरी ओर, अभियुक्त पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए न्यायालय में कहा कि वादिनी एवं उनकी पुत्रियों को पारिवारिक मौखिक समझौते के तहत संपत्ति के हिस्से के बदले फ्लैट दान में दिए जा चुके हैं, इसलिए वर्तमान मुकदमा दुर्भावनावश दर्ज कराया गया है।
सुनवाई के दौरान मामले में दत्तक पुत्र और उत्तराधिकार का विवाद भी प्रमुख मुद्दा रहा। वादिनी ने अपने दिवंगत भाई शरद वर्मा को माता-पिता का विधिवत दत्तक पुत्र बताते हुए उन्हें भी वैध उत्तराधिकारी बताया, जबकि अभियुक्त पक्ष ने इस दावे का स्पष्ट रूप से खंडन किया और कहा कि माता-पिता की अन्य कोई संतान नहीं थी।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों, अभियोजन सामग्री तथा दोनों पक्षों की दलीलों का गहन परीक्षण करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया जाली दस्तावेजों एवं कूटरचित हस्ताक्षरों के माध्यम से संपत्ति हड़पने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि मामले की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है।इन्हीं आधारों पर अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी शैलेन्द्र कुमार वर्मा की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
