✍️✍️ एनडीपीएस मामले में बड़ा फैसला: आरोपी दोषमुक्त
वाराणसी की विशेष एनडीपीएस अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका देते हुए विशेष आपराधिक वाद राज्य बनाम जयमंगल बिन्द में अभियुक्त जयमंगल बिन्द को स्वापक औषधि एवं मनोत्तेजक पदार्थ अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। यह निर्णय अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश (यू.पी.एस.ई.बी.) नीरज कुमार बक्शी की अदालत ने सुनाया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता अजय कुमार सिंह, श्याम सुंदर चौरसिया व विनोद कुमार ने प्रभावी पैरवी की ""
क्या था मामला?
अभियोजन के अनुसार, 17 अप्रैल 2014 को थाना सिगरा पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सनबीम स्कूल के पास घेराबंदी कर जयमंगल बिन्द और गुडलक गुप्ता को पकड़ा था। पुलिस का दावा था कि जयमंगल बिन्द के काले बैग से 1 किलो 100 ग्राम चरस, तीन लैपटॉप, दस मोबाइल फोन तथा एक फर्जी निर्वाचन पहचान पत्र बरामद हुआ था। इसके आधार पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने क्यों किया दोषमुक्त?
संपूर्ण साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि कथित बरामदगी की प्रक्रिया में एनडीपीएस एक्ट का समुचित पालन सिद्ध नहीं हो सका। पुलिस द्वारा प्रस्तुत सहमति पत्र में आवश्यक विवरणों का अभाव था तथा यह स्पष्ट नहीं था कि अभियुक्त को उसके वैधानिक अधिकारों की सही जानकारी दी गई थी।
इसके अतिरिक्त बरामद मादक पदार्थ की तौल संबंधी प्रक्रिया में भी गंभीर विरोधाभास सामने आया। एक गवाह ने मौके पर भौतिक तराजू से तौल किए जाने की बात कही, जबकि दूसरे गवाह ने मिठाई की दुकान पर इलेक्ट्रॉनिक तराजू से वजन करने का बयान दिया। न्यायालय ने इन विरोधाभासों को अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह उत्पन्न करने वाला माना।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि घटना स्थल भीड़भाड़ वाला होने के बावजूद पुलिस ने किसी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह को बरामदगी का साक्षी नहीं बनाया। साथ ही विवेचक द्वारा एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त होने से पूर्व ही आरोप पत्र दाखिल कर देना तथा माल का समुचित भौतिक सत्यापन न करना भी विवेचना की गंभीर कमी माना गया।
न्यायालय का आदेश
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त जयमंगल बिन्द को संदेह का लाभ देते हुए एनडीपीएस एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
