✍️✍️ छेड़छाड़ व मारपीट मामले में ,कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत मंजूर
वाराणसी के सत्र न्यायालय ने वर्ष 2017 के एक पुराने आपराधिक मामले में सुनवाई करते हुए अभियुक्त दरोगा उर्फ अखिलेश को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायालय ने अभियुक्त की अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए उसे निर्धारित शर्तों के साथ राहत प्रदान की।
""अदालत मे बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्तागण संजय साहनी, संजय कुमार सिंह, अखिलेश कुमार व डॉ जितेंद्र कुमार यादव ने पक्ष रखा ""
क्या है मामला?
अभियोजन के अनुसार, वादिनी ने आरोप लगाया था कि 28 अगस्त 2017 की रात लगभग 9 बजे वह घर में अकेली थीं, जबकि उनके पति बाहर पानी लेने गए थे। इसी दौरान अभियुक्त दरोगा उर्फ अखिलेश कथित रूप से शराब के नशे में घर में घुस आया और उनके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। विरोध करने और शोर मचाने पर अभियुक्त ने वादिनी के साथ मारपीट की तथा उनके पति के लौटने पर उनके साथ भी मारपीट की। इस संबंध में थाना बड़ागांव, वाराणसी में भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए एवं 323 में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पक्षों का तर्क व दलील
👉 अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि वादिनी के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं। साथ ही अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह निर्दोष है। जबकि जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए अभियुक्त को राहत नहीं दी जानी चाहिए।
न्यायालय का आदेश
दोनों पक्षों की दलीलों एवं उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के उपरांत सत्र न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना अभियुक्त की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
न्यायालय ने आदेश दिया कि अभियुक्त दस दिनों के भीतर संबंधित न्यायालय में उपस्थित होकर ₹50,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान राशि के दो प्रतिभू प्रस्तुत करेगा और शर्त रखी की अभियुक्त भविष्य में इस प्रकार का कोई अपराध नहीं करेगा।अभियोजन पक्ष के गवाहों को किसी भी प्रकार से प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा। विचारण के दौरान न्यायालय की प्रत्येक तिथि पर उपस्थित रहेगा तथा गवाहों की अनुपस्थिति का अनुचित लाभ उठाकर अनावश्यक स्थगन की मांग नहीं करेगा।
