✍️✍️ इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो बड़े आदेश: चर्चित मनीष सिंह हत्याकांड में आरोपी को जमानत, राजस्व भूमि विवाद में बुलडोजर/बेदखली कार्रवाई पर लगी रोक
प्रयागराज / वाराणसी |
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए एक ओर चर्चित मनीष सिंह हत्याकांड के सह-आरोपी को जमानत प्रदान की है, वहीं दूसरी ओर राजस्व भूमि विवाद से जुड़े मामले में बेदखली एवं बुलडोजर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाकर याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी है।
चर्चित मनीष सिंह हत्याकांड में गोविंद राजभर को मिली जमानत
न्यायमूर्ति समीर जैन ने क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लिकेशन (गोविंद राजभर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) में आदेश पारित करते हुए आरोपी गोविंद राजभर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
मामला वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के केस से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 190, 191(2), 103(2), 324(5) एवं 3(5) के तहत अभियोग दर्ज है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्तागण कमलेश कुमार राजभर एवं बाबू लाल राम ने दलील दी कि एफआईआर में कुल 13 लोगों को सामान्य भूमिका दी गई है तथा पुलिस द्वारा बाद में दर्ज किए गए कथित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान विश्वसनीय नहीं हैं और वे प्रथम दृष्टया 'चांस विटनेस' प्रतीत होते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि सह-आरोपी पर विशिष्ट प्रहार का आरोप है, जबकि गोविंद राजभर के विरुद्ध ऐसा कोई प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
शासकीय अधिवक्ता एवं वादी पक्ष ने जमानत का विरोध किया, किंतु न्यायालय ने पाया कि गवाहों के बयान विलंब से दर्ज हुए हैं, आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तथा वह मई 2026 से जेल में निरुद्ध है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने शर्तों के साथ जमानत मंजूर कर दी।
भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने बेदखली आदेश पर लगाई रोक
दूसरे मामले में रिट (मुकुंद राजभर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह प्लॉट संख्या-228, जो राजस्व अभिलेखों में आबादी (श्रेणी 6-2) के रूप में दर्ज है, पर काबिज है। इसके बावजूद प्रशासन ने यह मानते हुए कि वह प्लॉट संख्या-222 (नवीन परती) पर अतिक्रमण किए हुए है, उसके विरुद्ध बेदखली एवं हर्जाने का आदेश पारित कर दिया।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि अपील में इस तथ्य को स्पष्ट रूप से उठाया गया था, लेकिन अपीलीय प्राधिकारी ने टाइपिंग त्रुटि का हवाला देकर अपील निरस्त कर दी।
मामले को विचारणीय मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार एवं ग्राम सभा को छह सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित करते हुए तहसीलदार (30 मई 2026) तथा जिला मजिस्ट्रेट (2 जुलाई 2026) द्वारा पारित बेदखली एवं हर्जाने के आदेश के प्रभाव और संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है।
