✍️✍️ Two convicted in 18-year-old SC/ST Act case, court pronounces sentence


✍️✍️ 18 साल पुराने एससी/एसटी एक्ट मामले में दो दोषी, अदालत ने सुनाई सजा

वाराणसी अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) वाराणसी सुधाकर राय की अदालत ने वर्ष 2008 में जमीन के विवाद को लेकर हुई मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी के मामले में दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।

 "" अदालत मे अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने पक्ष रखा""

अभियोजन के अनुसार, वादी प्रेमचंद पुत्र बुचनु, निवासी पुआरी खुर्द/सेमरी, थाना बड़ागांव (हाल निवासी धनेशरी, वाराणसी) ने थाना बड़ागांव में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि 24 जुलाई 2008 की शाम करीब सात बजे अभियुक्त मुमताज पुत्र बबूल और ठाकुर प्रसाद उर्फ हीरालाल हलवाई उन्हें भदोही से एक लड़की की विदाई कराकर लौट रहे थे। आरोप है कि रास्ते में सुनसान स्थान पर जीप रोककर दोनों ने वादी पर उसकी ससुराल की जमीन अपने नाम कराने का दबाव बनाया।

वादी के विरोध करने पर आरोपियों ने कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए लाठी-डंडों और समरसेबल की चेन से मारपीट की। इसके बाद घायल अवस्था में उन्हें हरहुआ चौराहे के पास तेल टंकी के निकट छोड़कर फरार हो गए। शिकायत में चार मरकी चांदी की सिकड़ी, हाथ की घड़ी और 500 रुपये छीन लेने का भी आरोप लगाया गया था।

घटना के बाद पीड़ित का उपचार एसएसपीजी अस्पताल, कबीरचौरा में कराया गया। मेडिकल परीक्षण में शरीर पर कुंद वस्तु से लगी कई चोटों की पुष्टि हुई। मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बड़ागांव संतोष कुमार सिंह ने की। जांच के दौरान धारा 394 का आरोप प्रमाणित नहीं पाए जाने पर उसे हटाते हुए आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी, उनके माता-पिता, चिकित्सक, विवेचक तथा मुहर्रिर सहित कुल छह गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने मुमताज और ठाकुर प्रसाद उर्फ हीरालाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504, 506 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(x) के तहत दोषी ठहराया।

अदालत ने दोनों दोषियों को विभिन्न धाराओं के तहत एक-एक वर्ष के साधारण कारावास, जुर्माना तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई। सजा के बाद दोनों अभियुक्तों के जमानत बंधपत्र निरस्त कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला कारागार, वाराणसी भेज दिया गया।

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