वाराणसी।
जनपद न्यायालय के सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत ने दहेज उत्पीड़न और जबरन गर्भपात कराने के गंभीर आरोपों में जेल में बंद पति और सास को जमानत दे दी है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और पत्रावलियों के अवलोकन के बाद 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की दो प्रतिभूतियों पर रिहाई का आदेश जारी किया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता सरफराज अहमद, चंद्रभान मौर्य व मोहम्मद हारून रजबी ने पक्ष रखा""
मामले की पृष्ठभूमि
अभियोजन के अनुसार, वादिनी विमला देवी ने थाना सारनाथ में अपनी बहन सोनी देवी के ससुराल वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि शादी में पर्याप्त दहेज देने के बावजूद सास धन्नो देवी उर्फ नन्हकी और पति अमित सोनकर उसे प्रताड़ित करते थे। आरोप यह भी था कि अभियुक्तों ने सोनी देवी को कोई नशीली दवा खिलाकर उसका गर्भपात करा दिया, जिससे उसकी हालत काफी बिगड़ गई और उसे 'चन्द्रप्रभा सर्जिकल हॉस्पिटल' में भर्ती कराना पड़ा।
👉 बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता 11 मार्च 2026 से ही अपने मायके में रह रही थी, जबकि एफआईआर काफी देरी से 2 अप्रैल 2026 को दर्ज कराई गई। प्राथमिकी में गर्भपात की किसी निश्चित तिथि या समय का उल्लेख नहीं है। सास धन्नो देवी एक वृद्ध महिला हैं और अमित सोनकर का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। दोनों अभियुक्त 3 अप्रैल 2026 से जिला कारागार वाराणसी में बंद थे।
न्यायालय का आदेश और शर्तें
न्यायाधीश ने केस की परिस्थितियों और साक्ष्यों को देखते हुए, मामले के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए, जमानत याचिका स्वीकार कर ली। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ सख्त कुछ शर्तें भी लागू की ।

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